सुल्तान समीक्षा (Sultan Review in Hindi ) सलमान ख़ान|Bollymoviereviewz
Saturday, July 9, 2016

सुल्तान समीक्षा (Sultan Review in Hindi ) सलमान ख़ान

Sultan Review  in Hindi

Average Ratings:3.4/5 
Score: 100 % Positive
Reviews Counted: 5
Positive:5
Neutral: 0
Negative:0



Ratings:3.5/5 Review By:Ajay Brahamtej Site:Dainik Jagran
अली अब्बास जफर ने हरियाणा के बैकड्राप में रेवाड़ी जिले के बुरोली गांव के सुल्तान और आरफा की प्रेमकहानी में कुश्ती का खेल जोड़ कर नए तरीके से एक रोचक कथा बुनी है। इस कथा में गांव, समाज और देश के दूसरी जरूरी बातें भी आ जाती हैं, जिनमें लड़कियों की जिंदगी और प्रगति का मसला सबसे अहम है। लेखक और निर्देशक अली अब्बास जफर उन पर टिप्पणियां भी करते चलते हैं। उन्होंने शुरू से आखिर तक फिल्म को हरियाणवी माटी से जोड़े रखा है।अली अब्बाय जफर ने ‘सुल्तान’ में किरदारों और दृश्यों में देसी भाव और व्यवहार को ढंग से पेश किया है। किरदारों के आपसी संबंध और बातों में आई आत्मीयता फिल्म का प्रभाव बढ़ा देती है। इरशाद कामिल और विशाल-शेखर के गीत-संगीत में फिल्म की थीम, किरदारों के इमोशन और पॉपुलर जरूरतों पर समान रूप से ध्यान दिया गया है।
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Ratings:3.5/5 Review By:R J Alok Site:Aaj Tak
फिल्म की कहानी तो रेसलर की जिंदगी पर आधारित है लेकिन फिल्मांकन के दौरान काफी लंबी लगने लगती है, सिलसिलेवार कई सारी घटनाएं घटती जाती हैं, जो वर्तमान और फ्लैशबैक के साथ गुजरती हैं. इंटरवल के बाद थोड़ी बोरियत भी होने लगती है, यही कारण है की फिल्म को एडिटिंग के साथ और भी क्रिस्प किया जा सकता था. हालांकि लोकेशंस और सिनेमेटोग्राफी काबिल ए तारीफ हैं. सलमान की मौजूदगी फिल्म को और भी दर्शनीय बनाती है. फाइट सीक्वेंस कमाल के हैं साथ ही सिनेमेटोग्राफी जबरदस्त है. सलमान की मौजूदगी, रोमांचक फाइट सीक्वेंस और सुल्तान की कहानी के लिए जरूर देखी जा सकती है. फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी लंबाई है. फिल्म को अच्छे तरीके से एडिट करके छोटा और क्रिस्प किया जा सकता था. वैसे तो फिल्म की कमाई बहुत होगी क्योंकि 5 दिनों का वीकेंड मिला है लेकिन उस हिसाब से फिल्म को और भी ज्यादा कट टू कट बनाया जा सकता था.
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Ratings:3/5 Review By:Prashant Site:NDTV
फिल्म की कहानी एवरेज है... 'सुल्तान' देखने के बाद आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आपने कोई बेहतरीन कहानी देखी है... सलमान के हीरोइज़्म को ध्यान में रखकर बुने जाने के कारण स्क्रीनप्ले लंबा लगता है... फिल्म में सलमान का क़िरदार जमाने में ज़्यादा वक्त निकल जाता है, जिसकी वजह से फिल्म का पहला भाग ज़रा ढीला लगता है, लेकिन जो सलमान खान के फ़ैन हैं, उन्हें शायद ऐसा न लगे 'सुल्तान' जहां देश की मिट्टी के खेल पहलवानी की बात करती है, वहीं 'बेटी बचाओ' मुहिम से जुड़ा मज़बूत संदेश भी देती है... कुल मिलाकर 'सुल्तान' फ़ैन्स के लिए सलमान की ओर से ईदी साबित हुई... वैसे 'सुल्तान' कोई महान सिनेमा नहीं, लेकिन सलमान के फ़ैन्स के लिए मेरी ओर से फिल्म की रेटिंग है -3
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Ratings:3.5/5 Review By:Yasir Usman Site:ABP News
कहानी में नयापन भले ही ना हो, लेकिन आदित्य चोपड़ा का स्क्रीनप्ले बेहद कसा हुआ है और अली अब्बास ज़फ़र का निर्देशन बढ़िया है. फिल्म में लव स्टोरी को आधार बना कर सारे फाइट सीन को एक वजह दे दी गई है. इसी वजह से कुश्ती या फाइट सीन की भरमार होते हुए भी वो कहीं बोर नहीं करते. कसा हुआ स्क्रीनप्ले और एडिटिंग फिल्म की रफ़्तार धीमी नहीं पड़ने देते.‘सुल्तान’ ढाई घंटे का ज़बरदस्त मनोरंजन और सलमान ख़ान के स्टारडम की नुमाइश है. वो हरियाणवी बोलते हैं, कॉमेडी करते हैं, गंभीर सीन में भी छाप छोड़ते हैं और फाइट करते हुए कमाल के लगते हैं. फिल्म के हर सीन में सलमान हैं और वो पूरे फॉर्म में हैं.
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Ratings:3.5/5 Review By:Dainik Bhaskar Site:Dainik Bhaskar
डायरेक्शन में अली अब्बास जफर की खास पकड़ दिखी। हर एक फ्रेम में उनकी मेहनत नजर आई। अलग-अलग लोकशन्स पर सीन के हिसाब से बखूबी फिल्मांकन दिखाई पड़ता है। हालांकि, कहानी को और छोटा किया जा सकता था क्योंकि एक वक्त के बाद वो लम्बी लगने लगती है। फिल्म के फाइट सीक्वेंस बहुत ही उम्दा तरह से शूट किए गए हैं। फिल्म देखते वक्त हर तरह के इमोशंस आपके इर्द गिर्द घूमते हैं। अगर आप सलमान के डाय हार्ड फैन है तो 'सुल्तान' आपके लिए बनाई गई है। इसके अलावा स्टार्स की परफॉर्मेंस, म्यूजिक, बेहतरीन कहानी के लिए सुल्तान देखी जा सकती है। हालांकि, फिल्म की लेंथ (2 घंटे 50 मिनट) इसका माइनस प्वाइंट साबित हो सकती है।
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Sultan Story:  

सुल्तान भारतीय हिन्दी फ़िल्म है, जिसका निर्देशन अली अब्बास जाफ़र ने तथा इसका निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है। इसमें मुख्य किरदार में सलमान खान और अनुष्का शर्मा हैं।

Sultan Release Date:

July 6th 2016

 निर्देशक: अली अब्बास जाफ़र

 निर्माता: आदित्य चोपड़ा

अभिनेता:
सलमान खान - सुल्तान अली खान
 अनुष्का शर्मा
 रणदीप हुड्डा
अमित साध - सुल्तान (बाल)

Run Time:  2 hours and 49 Minutes


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Sultan Theatrical Trailer:

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Sultan Theatrical Trailer
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Sultan First Teaser trailer
Sultan Poster

We will also cover Sultan reviews in hindi later in the day

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सुल्तान  समीक्षा (Sultan Review  in Hindi ) सलमान ख़ान
  • Title : सुल्तान समीक्षा (Sultan Review in Hindi ) सलमान ख़ान
  • Posted by :
  • Date : Saturday, July 9, 201612:07 AM
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4 comments:

  1. सुल्तान:
    भाई मुबारक!! [3/5]

    ‘भाई’ की कोई भी फिल्म ‘भाई’ की ही फिल्म होती है. ‘सुल्तान’ कुछ अलग नहीं है. हाँ, कुछ मामलों में थोड़ी बेहतर ज़रूर है. बड़े कसमसाते हुए ही सही, ‘भाई’ यहाँ 30 की उम्र से सफ़र करते हुए 40 की दहलीज़ तक पहुँचने का दम-ख़म दिखाते हैं, पहली बार. हालाँकि ‘भाई’ पहले भी स्क्रीन पर शर्ट उतारते नज़र आये हैं, पर इस बार जब वो ऐसा करते हैं, अन्दर से उनके गठीले बदन के खांचे नज़र नहीं आते बल्कि एक थुलथुली सी तोंद सामने छलक पड़ती है. जाने-अनजाने ही सही, ‘भाई’ ने किरदार में ढलने की ओर एक सफल कोशिश तो कर ही दी है. रही-सही कोर-कसर पूरी कर देते हैं ‘मस्तराम’ और ‘मिस टनकपुर हाज़िर हों’ के अभिनेता राहुल बग्गा, जो इस फिल्म में ‘भाई’ के हरियाणवी लहजे पे नज़र रखने वाले मास्टरजी बनकर परदे के पीछे ही डटे रहते हैं. इतने सब के बावजूद भी, ‘भाई’ अपने एक उसूल से पीछे नहीं हटते. ‘भाई’ एहसान लेते नहीं, एहसान करते हैं. चाहे वो अकेले हल चलाकर खेत जोतना ही क्यूँ न हो. वैसे अगर हल को पीछे से जमीन में जोतना वाला कोई न हो तो ये काम काम रह ही नहीं जाता. फिर तो आप दौड़ते रहिये हल सर पे उठाये.

    ‘सुल्तान’ में पहलवानी और मुक्केबाजी भरपूर है, पर इसे एक ‘स्पोर्ट्स फिल्म’ कहना उतना ही बचकाना होगा जितना साजिद खान की फिल्मों को कॉमेडी कहना. असलियत में ‘सुल्तान’ दो कुश्तिबाज़ों की प्रेम-कहानी है. आरफ़ा [अनुष्का शर्मा] और सुल्तान [सलमान खान]. आरफ़ा ओलंपिक्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल करने का सपना देख रही है. गाँव का निठल्ला-नालायक सुल्तान जब उसे पहली बार मिलता है, आरफ़ा के मन में कोई दो राय नहीं है. उसके लिए उसका सपना ही सब कुछ है. आपको लगता है ये है हरियाणे की लड़की. बाद में, 30 साल का सुल्तान उसके प्यार में पहलवान तक बन जाता है. अचानक आरफ़ा को निकाह पढ़वाना है. अचानक आरफ़ा को माँ बनने से भी कोई दिक्कत नहीं. अचानक आरफ़ा को अपना सपना सुल्तान के सपने में दिखने लगता है. और ये सब सिर्फ इसलिए क्यूंकि ‘सुल्तान’ ‘भाई’ की फिल्म है. और चूँकि ‘सुल्तान’ ‘भाई’ की फिल्म है तो ‘भाईगिरी’ तो रहेगी ही; ‘बीइंग ह्यूमन’ का तड़का भी होगा, कभी न कम पड़ने वाला ‘स्वाग’ भी होगा, थोड़ी उल-जलूल हरकतें भी होंगीं, इमोशंस का बहाव भी होगा और होगा ढेर सारा एक्शन. सब है. अगर कुछ नहीं है, तो ये सब होने की कोई ख़ास, कोई मुक्कमल वजह!

    तकरीबन 3 घंटे के अपने पूरे वक़्त में, ‘सुल्तान’ बेहतरीन कैमरावर्क, शानदार प्रोडक्शन-डिज़ाइन, जोशीले साउंडट्रैक और कुछ बहुत अच्छे फाइटिंग सीक्वेंस के साथ आपको बांधे रखने की पूरी कोशिश करती है. अभिनय में कुमुद मिश्रा, अमित साढ और सुल्तान की दोस्त की भूमिका करने वाला कलाकार पूरी तरह प्रभावित करते हैं. रणदीप हुडा मेहमान कलाकार की हैसियत से थोड़े ही वक़्त स्क्रीन पर नज़र आते हैं. अनुष्का के किरदार के साथ फिल्म की कहानी भले ही पूरी तरह न्याय करती न दिखती हो, पर अनुष्का कहीं भी कमज़ोर नहीं पड़तीं. ‘भाई’ की फिल्म न होती तो शायद हम और फिल्म के लेखक इस किरदार की पेचीदगी को और समझने की कोशिश ज़रूर करते.

    अंत में; ‘सुल्तान’ में सलमान बहुत हद तक फिल्म के किरदार को अपनाने की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं. फिल्म में कई बार अपने हाव-भाव, अपने लहजे-लिहाज़ और अपने पहनावे से सलमान आपको चौंका देते हैं, और ये हिंदी सिनेमा के लिए काफी अच्छे संकेत हैं हालाँकि उनके अभिनय के बारे में अब भी बहस की जा सकती है, पर सबसे ज्यादा निराश करती है फिल्म की औसत कहानी और उसके घिसे-पिटे डायलाग. ज़िन्दगी के थपेड़ों से लड़ते-जूझते बॉक्सर जिनको अंततः मोक्ष, मंजिल, मुक्ति मिलती है बॉक्सिंग रिंग के अन्दर ही; ऐसी कितनी ही कहानियाँ हम पहले भी परदे पर देखते आये हैं, और इससे कहीं बेहतर ढंग से कही गयी, पर ‘सुल्तान’ की बात अलग है. ये ‘भाई’ की फिल्म है, तो ईद के मौके पर आप सबको...‘भाई मुबारक’! [3/5]

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  2. Bhai Gaurav Rai. I liked your review in Hindi. But frankly speaking your English reviews were better. Would like to see reviews in English from this movie itself.

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  3. The story begins with Sultan (Salman Khan) entering into a wrestling match. A longing past and love story haunt him, and he leaves the village. The movie then slips into the flashback mode. Sultan sees Aarfa (Anushka Sharma) who is a total badass. She’s a wrestler and takes down men twice her size. It’s love at first sight for Sultan, while Aarfa does not reciprocate to the feelings and friend-zones him. She asks him to concentrate on his career and focus on the future, which motivates Sultan to take up wrestling. He becomes a pro at the sport and love blossoms between the two. Sultan now concentrates on his career and is on a winning streak. He goes on to win even in the Olympics! While he is busy concentrating on his career, he is now neglecting his wife Aarfa. They have a baby boy, Aman. Sadly, Aman dies and Aarfa blames Sultan for his negligence. How Sultan goes to win back Aarfa, and how under the able training of Randeep Hooda he goes on to win the free-style martial arts title is what the rest of the movie is about. You can see the complete Arjun Yajath movie Sultan Review at www.teluguodu.com

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