Fan Review in Hindi (फैन मूवी रिव्यू समीक्षा)|Bollymoviereviewz
Saturday, April 16, 2016

Fan Review in Hindi (फैन मूवी रिव्यू समीक्षा)


Fan Review in Hindi (फैन मूवी समीक्षा)

Fan Review in Hindi
Average Ratings:3/5
Reviews Counted:6
Positive:5
Neutral:1
Negative :0

From All the  Top Professional Critics reviews on the web .

Ratings:3/5 Review By:अजय ब्रह्मात्मज Site:Dainik Jagran
एक अंतराल के बाद शाहरुख खान की ऐसी फिल्म आई है, जिसमें एक कहानी है। उन्हें अभिनय योग्यता और क्षमता भी दिखाने का अवसर भी मिला है। साथ ही निर्देशक मनीष शर्मा का स्पष्ट सिग्नेचर है। इस फिल्म में भी दिल्ली है यह फिल्म पहचान और परछाई के द्वंद्व पर केंद्रित है। मिथक और मिथ्या में लिपटी 'फैन' देखने लायक फिल्म है।
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Ratings:3.5/5 Review By:नवभारत टाइम्स Site:Navbharat Times
मनीष शर्मा ने इंटरवल से पहले की फिल्म को कहीं कमजोर नहीं होने दिया लेकिन इंटरवल के बाद अचानक फिल्म आपके सब्र का इम्तहान लेने लगती है। आर्यन खन्ना को परेशान करने और उससे बदला लेने के लिए गौरव चानना जो रास्ता अपनाता है उस पर हंसी आती है। वहीं, फिल्म में कई ऐसे डायलॅाग भी हैं, जो किंग खान के फैंस की भावनाओं को आहत कर सकते है।
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Ratings:3/5 Review By:आर जे अालोक Site:AAJ Tak
फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी उम्दा है लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी बड़ी लगने लगती है, लम्बे-लम्बे चेस सीक्वेंस और कई सारी काल्पनिक घटनाएं घटने लगती है, हालांकि बेहतरीन लोकशन्स, लाजवाब सिनेमेटोग्राफी और गजब की स्क्रिप्ट फिल्म को बांधे रखती है. कहानी का अंत थोड़ा बेहतर हो सकता था. फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसका सेकंड हाफ का हिस्सा है, उसे और भी अच्छे से सजाया जा सकता था. कई ऐसी घटनाएं घटती हैं जिससे कनेक्ट कर पान काफी मुश्किल होता है. लम्बे चेसिंग सीक्वेंस बोर करने लगते हैं.
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Ratings:3/5 Review By:यासिर उस्मान, Site:ABP News
निर्देशक मनीष शर्मा ने दोनों किरदारों को बैलेंस करने की कोशिश की है और आख़िर तक आपकी समझ में नहीं आएगा कि कौन सही है और आप किसका साथ दें. फिल्म में कोई गीत नहीं है और रफ़्तार भी धीमी नहीं पड़ती. फरफॉरमेंस के हिसाब से ये शाहरुख की पिछली कई फिल्मों में सबसे बेहतर परफॉरमेंस है. अपने दोनों ही रोल में उन्होंने बहुत अच्छा अभिनय किया है. मगर कमज़ोर स्क्रिप्ट उनका साथ नहीं देती. इस अच्छे आइडिया के साथ सबको और बेहतर फिल्म की उम्मीद थी. लेकिन अगर आप शाहरुख ख़ान के फैन है तो ये फिल्म ज़रूर देखिए.
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Ratings:3/5 Review By:दैनिक भास्कर  Site:Dainik Bhaskar
फिल्म का डायरेक्शन ठीकठाक है। फिल्म का फर्स्ट हाफ कुछ स्लो है तो वहीं सेकंड हाफ काफी लम्बा है।अलग-अलग जगहों की लोकेशन्स इसमें चार चांद भी लगाती है। मुंबई, क्रोएशिया, लंदन और दिल्ली में फिल्माए गई इस फिल्म की सिनेमेटोग्राफी भी कमाल की है, जिसके लिए मनु आनंद बधाई के पात्र हैं। साथ ही स्क्रीनप्ले भी कमाल का है।फिल्म की कहानी रियलिटी से काफी दूर नजर आती है। सेकंड हाफ थोड़ा बड़ा है, जिसमें कहानी लंदन से होकर मुंबई और दिल्ली तक पहुंचती हैं। इसे और बेहतर तरह का अंजाम दिया जा सकता था। वैसे, अगर आप शाहरुख खान के जबरा फैन हैं, तो ये फिल्म देख सकते हैं।
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Ratings:2.5/5 Review By:नरेंद्र सैनी  Site:Aaj Tak
फिल्म देखकर जो बात मन में आई वह यही थी कि फिल्म समझ तो आई लेकिन दिल में नहीं आई. मनीष शर्मा ने विषय अच्छा चुना, पहला हाफ भी मजेदार रहा लेकिन वे वैसा बिल्डअप नहीं कर सके जैसा इस तरह की थ्रिलर के लिए किया जाता है. फिर जो डर नजर आना चाहिए था या जो दहशत शाहरुख की पहली फिल्मों में दिखी थी चाहे वह 'बाजीगर' हो या फिर 'डर' वह इसमें पूरी तरह नदारद है. कुल मिलाकर यह एक औसत फिल्म बनकर रह जाती है, जिसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं होता और सब कुछ बहुत ही स्वाभाविक है. लेकिन फिल्म थ्रिलर कहना बिल्कुल ही गलत होगा.
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फैन मूवी कहानी:  

फ़ैन एक भारतीय बॉलीवुड फ़िल्म है जिसका निर्देशन मनीष शर्मा कर रहे है। इसमें मुख्य किरदार में शाहरुख खान हैं। इसका निर्माण आदित्य चोपड़ा कर रहे हैं


फैन मूवी Release Date:

April 15, 2016


फैन मूवी Trailer:

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Fan Review in Hindi (फैन मूवी रिव्यू समीक्षा)
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1 comments:

  1. फ़ैन:
    अभिनय हावी, फिल्म हवा!! [3/5]

    कुछ भी तो नया नहीं है. बस शाहरुख़ खान साब वापस लौट आये हैं. ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ वाले उबाऊ शाहरुख़ नहीं, ‘बाज़ीगर’ और ‘डर’ वाले प्रयोगधर्मी शाहरुख़! एक लंबे अरसे से जहां उनकी सारी मेहनत-मशक्कत अपने स्टारडम की चकाचौंध से अपनी और कुछ अपने ही लोगों की औसत दर्जे की फिल्मों को बॉक्स-ऑफिस पर सफल साबित करने में जाया जा रही थी, इस बार काफी हद तक अपने दोनों किरदारों को परदे पर जिंदा रखने और जिंदा दिखाने की कोशिशों में ज्यादा कामयाब होती नज़र आती है. मनीष शर्मा की ‘फ़ैन’ शाहरुख़ के उस बेजोड़ ललक, लगन और अभिनय के प्रति लगाव को हवा देती है, बॉलीवुड की बादशाहत हासिल करने में जिसने एक बड़ी भूमिका निभाई है. शाहरुख़ बेझिझक इस मौके का पूरा फायदा उठाते हैं. पर अफ़सोस, एक फिल्म के तौर पर ‘फ़ैन’ अपनी छाप छोड़ने में उतनी शिद्दत नहीं दिखा पाती.

    दिल्ली की तंग गलियों में एक छोटे से मोहल्ले का हीरो है, गौरव! फिल्मस्टार आर्यन खन्ना का हमशकल और फ़ैन. लोग उसे ‘जूनियर आर्यन खन्ना’ बुलाते हैं और वो आर्यन खन्ना को ‘सीनियर’! मासूमियत का आलम ये है कि उसे लगता है मुंबई पहुँचने पर आर्यन उसे पलकों पर बिठा लेगा, पर अपना फिल्मस्टार तो उसे अपनी जिंदगी के 5 मिनट देने से भी मुंह मोड़ लेता है. एक-दो बेवजह के रोमांचक एक्शन दृश्यों को छोड़ दें तो यहाँ तक की फिल्म आपको पूरी तरह अपने गिरफ्त में जकड़े रखती है, पर इसके तुरंत बाद जब वाहियात और उल-जलूल की नाटकीयता का दौर शुरू होता है तो आपके पास भी एक वक़्त बाद फिल्म के ख़तम होने का इंतज़ार करने के अलावा बहुत कुछ करने को नहीं रह जाता.

    ‘फ़ैन’ को आप बड़ी आसानी से ‘प्री-इंटरवल’ और ‘पोस्ट-इंटरवल’ में बांट कर देख सकते हैं. दोनों एक-दूसरे से उतने ही अलग-थलग दिखाई देते हैं जितना आर्यन और उसका डुप्लीकेट गौरव. फिल्म के पहले हिस्से में हबीब फैसल साब की राइटिंग आपको दिल्ली के मिडिल-क्लास तबके के आस-पास ही भटकने की इजाज़त देती है. और इसीलिए इस हिस्से से आपका जुड़ाव जबरदस्ती का नहीं लगता. गौरव साइबर कैफे चलाता है, ठीक उसी तरह के सेटअप में जैसे ‘दम लगाके हईशा’ में आयुष्मान कैसेट की दूकान. हैरत तब होती है जब फिल्मस्टार को उसकी जगह दिखाने और उसके अहम को सबक सिखाने की पूरी भाग-दौड़ में दिल्ली का मिडिल-क्लास नौजवान विदेशों में एक मंजे हुए कॉन-आर्टिस्ट की तरह अपनी सनक भरी हरकतें अंजाम देने लगता है. आपका लगाव अब जमीनी किरदारों से हटकर भारी-भरकम एक्शन दृश्यों की सफाई पर टिक गया है. जबरदस्त शुरुआत के बाद, ‘फ़ैन’ अब अंततः एक औसत फिल्म बने रहने की ओर तेज़ी से लुढ़कने लगी है.

    फिल्म के कमज़ोर पक्षों में शामिल हैं, फिल्म की लम्बाई, बेवजह का ड्रामा, ठूंसा हुआ एक्शन और लचर स्क्रीनप्ले, खास तौर पर इंटरवल के बाद! इसके बावजूद, ‘फ़ैन’ देखने का अगर आप कोई भी बहाना ढूंढ रहे हों तो वो शाहरुख़ का अभिनय ही हो सकता है. हालाँकि हॉलीवुड एक्सपर्ट्स का मेक-अप दोनों किरदारों को बखूबी एक-दूसरे से अलग नज़र आने में मदद करता है, पर शाहरुख़ जिस संजीदगी से दोनों किरदारों को परदे पर जीते हैं, आप हैरान हुए बिना नहीं रह पाते. सुपरस्टार आर्यन का जिद्दी अक्खडपन, गौरव का डराने वाला पागलपन और इनके बीच लगातार रंग बदलते शाहरुख़, इसी की कमी तो अब तक खल रही थी, शाहरुख़ के चाहने वालों को भी और उनके आलोचकों को भी! [3/5]

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